क्षेत्रीय समाचार - CHHATTISGARH
- BILASPUR
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 फर्जी प्रमाण पत्र से पा ली खेल कोटे में सरकारी नौकरी!
सरकारी विभागों में खेल कोटे के तहत होने वाली भर्ती अब शक के दायरे में आ गई है। शासन को शक है कि फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर कुछ लोगों नौकरी हासिल कर ली है। सामान्य प्रशासन विभाग इसकी अंदरुनी तौर पर जांच कर रहा है। साथ ही विभाग ने सभी कमिश्नर-कलेक्टर्स को चिट्ठी लिखी है कि खेल कोटे में नौकरी देने से पहले प्रमाण पत्र की जांच जरूर कराएं।
खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार बेहतर खिलाड़ियों को उनकी योग्यता के मुताबिक विभिन्न पदों पर सीधी नौकरी देती है। इसके लिए उन्हें सामान्य बेरोजगारों की तरह परीक्षा और दूसरी प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ता। प्रदेश में भी बड़ी संख्या में खिलाड़ियों को खेल कोटे में नौकरी दी गई है।
हाल ही में भर्ती हुए कुछ लोगों के बारे में शासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं। बताया गया कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल कर ली और इस वजह से योग्य उम्मीदवार को नौकरी नहीं मिल पाई। उन्होंने इससे जुड़े दस्तावेज भी पेश किए। सरकार ने अंदरुनी तौर पर इसकी जांच कराई तो वाकई में कई गड़बड़ियां सामने आ गईं। इससे सामान्य प्रशासन विभाग भी हैरत में है। किसी कार्रवाई से पहले इसके लिए पुख्ता सबूत जुटाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि विभाग की अंदरुनी जांच आखिरी चरण में है। इधर, फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाले खिलाड़ियों से सकते में आए विभाग ने प्रदेश के तमाम अफसरों को खेल कोटे में नौकरी देने से पहले बेहद सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
विभाग के पत्र क्रमांक एफ 5-3/2011/1-9 में शासन के सभी विभागों, राजस्व मंडल के अध्यक्ष, सभी विभागाध्यक्ष, सभी संभागीय आयुक्त और सभी कलेक्टरों को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। उन्हें कहा गया है कि भर्ती से पहले उत्कृष्ट खिलाड़ी भर्ती नियम-2010 का पूरी तरह पालन किया जाए। दूसरे बिंदु में कहा गया है कि विभाग की जानकारी में यह बात आई है कि कुछ विभागों द्वारा उत्कृष्ट खिलाड़ियों के प्रमाण पत्रों की जांच कराए बिना ही नियुक्ति आदेश
जारी कर दिया गया है। यह नियमों का उल्लंघन है। पूरी तरह जांच-पड़ताल और सत्यापन के बाद ही भर्ती की प्रक्रिया पूरी की जाए।
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 फर्जी चेक मामले में एसपी पहुंचे हाईकोर्ट
बैंक में तीन करोड़ रुपए के चेक फर्जी निकलने के मामले में खातेदार पर ही मामला दर्ज करने के खिलाफ याचिका पर तलब किए गए धमतरी एसपी आज हाईकोर्ट में उपस्थित हुए। पुलिस द्वारा की जा रही जांच की प्रक्रिया में इस तरह के रवैये को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई में महाधिवक्ता को शामिल होने को कहा है।
धमतरी निवासी आजम रिजवी ने अपनी जमीन को चंडीगढ़ की कंपनी सिनर्जी टेली कम्युनिकेशन के पास बेचने का एग्रीमेंट किया। एग्रीमेंट पर कंपनी की ओर से अधिकृत किए गए सईद रजा और शेखर कोठारी ने रिजवी को तीन करोड़ रुपए का चेक दिया। रिजवी ने चेक को बैंक ऑफ इंडिया की धमतरी शाखा में जमा किया तो वह चेक फर्जी पाया गया।
बैंक के मैनेजर ने सिटी कोतवाली धमतरी में इसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इस मामले में पुलिस ने खातेदार आजम रिजवी पर ही धारा 420, 467,468 और 471 के तहत मामला दर्ज कर लिया। उसे जेल भेज दिया गया। रिजवी ने पुलिस से कहा भी कि वह खातेदार है, चेक देने वालों पर जुर्म दर्ज कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
बावजूद इसके पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उसने हाईकोर्ट में क्रिमिनल अपील लगाई। याचिका में मामले की जानकारी देते हुए बताया गया कि पुलिस ने दुर्भावनापूर्ण तरीके से कार्रवाई की है। कंपनी द्वारा अधिकृत सईद रजा और शेखर कोठारी को संदेह का लाभ देते हुए छोड़ दिया गया है, जबकि उसके खिलाफ कार्रवाई की गई है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने विवेचक राजेश साहू को उपस्थित होकर जानकारी देने का आदेश
दिया था।
विवेचक की जानकारी से संतुष्ट नहीं होने पर हाईकोर्ट ने धमतरी के एसपी को शुक्रवार को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर मामले में हुई जांच की विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट पहुंचे धमतरी एसपी ने विस्तार से जानकारी दी। पुलिस द्वारा दर्ज मामलों की जांच में इस तरह के रवैये और विवेचक के जानकारी देने में असमर्थता को हाईकोर्ट ने गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई पर 8 दिसंबर को महाधिवक्ता को सुनवाई में शामिल होने को कहा है।
डीईओ को मिला अवमानना नोटिस
बिलासपुर त्न हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने पर बिलासपुर जिला शिक्षाधिकारी को अवमानना नोटिस जारी किया गया है। तखतपुर ब्लाक के सैदा हायर स्कूल में पदस्थ शिक्षक कृष्ण गोपाल यादव ने बीईओ के समक्ष मांगपत्र प्रस्तुत किया। कई बार आवेदन देने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने हाईकोर्ट में अधिवक्ता आरके केशरवानी के जरिए याचिका पेश की।
याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को विभाग के समक्ष फिर से आवेदन देने और जिला शिक्षाधिकारी को चार सप्ताह में मामले का निराकरण करने का आदेश दिया। निर्धारित समय में कोई कार्रवाई नहीं होने पर श्री यादव ने अवमानना याचिका लगाई। इस पर हाईकोर्ट ने एक माह का और समय दिया। इसके बाद भी मामले में कोई निर्णय नहीं होने पर श्री यादव ने फिर से याचिका पेश की, इस पर हाईकोर्ट ने डीईओ और बीईओ को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है।
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 ढाई करोड़ का सोना पकड़ाया
बिलासपुर ! मुंबई के कनक लक्ष्मी ज्वेलस के दो एजेंटों को ढाई करोड़ सोने के जेवरों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। एजेंट व्यापारियों को माल देने के लिए स्टेशन से सराफा बाजार की तरफ आ रहे थे जिसे पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सिटी कोतवाली पुलिस ने अजीत होटल के पास पकड़ा। उनके पास से पुलिस को दो सूटकेशों में जेवरात मिले। जो 9 किलो है। एजेंटों ने बिल पेश किया वह अस्पष्ट है, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है आभूषणों को जब्त कर लिया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार मुंबई के ज्वेलरी बाजार स्थित कनकलता ज्वेलर्स के दो एजेंट अमृतलाल पाड़िया पिता खेमाजी पाड़िया 25 वर्ष और लक्ष्मण प्रजापति पिता धुपा जी प्रजापति 36 वर्ष निवासी कांदिवली मुंबई सोने के आभूषण लेकर बिलासपुर आये, वे स्टेशप पर उतरकर यहां के सराफा व्यापारियों को अपने आभूषण बेचने के लिए आ रहे हैं। यह सूचना पुलिस अधीक्षक अजय यादव को मिली। पुलिस अधीक्षक ने एएसपी वेदव्रत सिरमौर को कार्यवाही करने निर्देश दिए। एएसपी ने सिटी कोतवाली थाने को सूचित किया। फिर सिटी कोतवाली पुलिस ने टीआई एल.पी.द्विवेदी, अवधेश सिंह, हेमंत आदित्य और हरवेंद्र खूंटे की टीमने दोनों आरोपियों को अजीत हॉटल के समीप तेलीपारा में पकड़ा उन्हें पकड़कर थाने लाया गया जहां उनके दोनों सूटकेशों की तलाशी लेने पर भारी मात्रा में सोने से बने हार, अंगूठी और अन्य आभूषण मिले। जिसका वजन करवाने पर आभूषणों का वजन 9 किलोग्राम निकला जिनकी कीमत ढाई करोड़ रूपये है। जब इन दोनों से पुलिस ने इसका बिल मांगा तो उन्होंने जो बिल दिखाया वो अस्पष्ट था। बिल की जांच की जा रही है। पुलिस दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। वहीं सोने के आभूषणों को धारा 102 सी.आर.पी.सी. एक्ट के तहत् जब्त कर लिया गया है। ज्ञात हो कि दीपावली पर्व के दौरान पूर्व में भी नागपुर, मुंबई से यहां सोना व चांदी खपाने आए व्यापारी व उनके एजेंटों को पकड़ा गया था।
बिना बिल के
खरीद-फरोख्त
दीपावली के त्यौहार के अवसर पर सोने के आभूषणों आदि की भारी मात्रा में बिक्री होती है। जिसका फायदा उठाते हुए बड़े शहरों के बड़े ज्वेलर्स अपना माल बिना बिल के सराफा व्यापारियों को बेचते हैं। जिससे उनका मुनाफा बढ़ जाता है। वहीं यहां के सराफा व्यापारी भी बिना बिल के माल मिलने पर उसे बेचकर काली कमाई करते हैं। इससे सरकार को लाखों के राजस्व की क्षति होती है। इस कारण से बाहर से माल को मंगवा कर उसे यहां पर खपाते हैं। इस तरह के कई करोड़ो के जेवरों को शहर के सराफा कारोबारी अब तक खपा चुके हैं। अगर पूर्व में भी सूचना मिल जाती तो अब तक कई करोड़ के जेवर पकड़े जा सकते थे।
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 सड़कों के लिए सीएम ने दिए 50 करोड़
रायगढ़ ! महापौर महेंद्र चौहथा की पहल पर मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने रायगढ़ शहर की सडकों के जीर्णोध्दार और नै सडकों के निर्माण हेतु 50 करोड़ रुपये की स्वीकृति की अनुमति देते हुए इस्टीमेट भेजने कहा है. मुख्यमंत्री के आश्वासन से शहर में ख़ुशी की लहर है वहीँ महापौर ने मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह व नगरीय प्रशासन मंत्री राजेश मूणत का आभार जताया है। इस राशि से शहर की सड़कों की बदहाली दूर होने और नगर वासियों को धूल धक्कड़ से निजात मिलने की संभावना है। इस समबन्ध में मिली जानकारी के अनुसार रायगढ़ नगर निगम के महापौर महेंद्र चौहथा ने शुवार को मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह से मुलाकात कर शहर की समस्या से अवगत कराया. उन्होंने इस बात पर यादा जोर दिया कि शहर की तमाम सड़कें जर्जर हो चुकी है लिहाजा इन सडकों के नव निर्माण और जीर्णोध्दार के लिए पहल की आवश्यकता है. उन्होंने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि रायगढ़ नगर निगम के पास जरुरत के मुताबिक़ राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण यह कार्य नहीं हो पा रहा है। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने उन्हें आश्वस्त किया कि राशि की कमी के चलते विकास का कोई भी कार्य प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने इसचर्चा के दौरान उपस्थित नगरीय प्रशासन मंत्री राजेश मूणत से इस समस्या के निराकरण के लिए आवश्यक कार्यवाही का निर्देश दिया। श्री मूणत ने महापौर को इस कार्य हेतु 50 करोड़ रुपये स्वीकृत करने का आश्वासन देते हुए इस्टीमेट बनाकर भेजने कहा ताकि जल्द से जल्द इसकी स्वीकृति दी जा सके। महापौर महेंद्र चौहथा की इस पहल से शहर को शीघ्र ही नई सड़क की सौगात मिलने की संभावना प्रबल हो गई है. वहीँ महापौर ने मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री का आभार जताते हुए बताया कि अपने व्यस्त कार्यम के बावजूद उन्होंने न सिर्फ उनकी समस्या को गंभीरता से लिया बल्कि आश्वस्त भी कराया कि रायगढ़ शहर के विकास में सरकार मुक्त हस्त से सहयोग देगी।
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 सुविधा के नाम पर सिम्स में कमीशनखोरी का धंधा
बिलासपुर ! करोड़ो रूपए की लागत से बनाए गए छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान में कमीशनखोरी का खेल चल रहा है। इसमें सिम्स कर्मचारी व पुलिस चौकी के जवान भी पीछे नहीं है। यहां इलाज कराने आने वाले मरीजों को सुविधा देने के नाम पर कमीशन का धंधा फल-फूल रहा है। बाहरी लोगों ने सिम्स कर्मचारियों को छपा कूपन दे रखा है। जिसके आधार पर ग्राहक दिए जाने पर कर्मचारियों को कमीशन दिया जाता है।
सिम्स कर्मचारियों द्वारा कमीशन के एवज में दी गई सेवा जनसेवा के अंतर्गत नहीं आता है। जिस पर प्रबंधन द्वारा अंकुश लगाया जाना चाहिए।
मालूम हो कि शहर में करोड़ों रूपए खर्च कर रोगियों का इलाज करने सिम्स का निर्माण किया गया इसके निर्माण के पीछे शासन का उद्देश्य था कि इससे गरीब तबके के लोगों को राहत मिलने के साथ-साथ बड़ी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए दूसरे शहरों में जाने के बजाए यहीं हरसंभव चिकित्सा सुविधा मिल सके। इसके लिए यहां प्रशिक्षित कर्मचारियों को अच्छे वेतन पर नियुक्त किया गया है। किन्तु चंद पैसों की लालच में आकर सिम्स के हर वार्ड अथवा आफिस में बाहरी लोगों ने अपनी दुकान खोल रखी है। चाहे वह अपातकालीन चिकित्सा कक्ष हो अथवा पुलिस चौकी या नर्स का सर्विस टेबल इन सभी जगहों पर टेबल में लगाए गए कांच के नीचे तमाम तरह के विजीटिंग कार्ड मौजूद है। जिनमें प्रमुख रूप से किराए में वेन उपलब्ध कराने वाला, वकील, किराए में भवन, होटल, लाज आदि के विजीटिंग कार्ड देखने को मिल जाएंगे यह कार्य सिम्स के हर कक्ष में मौजद है। जो सीधे तौर पर दर्शाता है कि सिम्स में बाहरी लोगों ने अपनी दुकानें खोल कर लाभ कमा रहे हैं। इन दुकानदारों के साथ-साथ यहां नियुक्त कर्मचारी भी प्रतिग्राहक सौ रूपए तक अतिरिक्त कमाई कर रहा है। जिससे यहां इलाज कराने पहुंचे रोगी के परिजनों की जेबें काट रही है। जबकि सिम्स परिसर में बाहरी अथवा प्रायवेट एम्बुलेंस मंगाए जाने पर पूर्णत: रोक लगा दी गई है। लेकिन टेबल में रखे गए विजिटिंग कार्ड को देखकर ऐसा मालूम होता है कि सिम्स में बाहरी वाहनों आंशिक रूप से रोक लगाया गया है। जिसमें कर्मचारियों को भेंट पूजा दिए जाने के बाद यह रोक कुछ समय के लिए बेअसर हो जाता है। इस भेंट पूजा से मिली राशि का एक बडा भाग अधिकारियों तक दिए जाने की भी खबर है। यही वजह है कि पिछले छै सात सालों से सिम्स में अवैध व्यापार काफी फल-फूल रहा है। कमीशन के इस खेल में न तो दुकानदार ही सामने आता है और न ही ग्राहक। इस पूरे खरीद-फरोख्त में सिम्स कर्मचारी अपनी महती भूमिका अदा करते हैं और सौदा तय हो जाने के बाद संबंधित दुकानदार को फोन के माध्यम समय व जगह की सूचना दे दी जाती है। इसके पहले कि मरीज अस्पताल से बाहर जाए यहां नियुक्त सरकारी कर्मचारियों को इसका हिस्सा मिल जाता है।
सिम्स कर्मचारियों की देखदेखी यही कारनामा सिम्स स्थित पुलिस चौकी में भी होने लगा है। यहां पर भी टेबल में लगे कांच के नीचे तमाम तरह के विजीटिंग कार्ड देखे जा सकते हैं। जिनकी संख्या दो दर्जन से अधिक है। इस ओर सिम्स प्रबंधन का ध्यान नहीं होना शंका को जन्म देता है कि कहीं यह सारा व्यापार उपर से संचालित नहीं हो रहा है। इस संदर्भ में सिम्स अधीक्षक रमणेश मूर्ति से मोबाइल फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई किन्तु सिम्स अधीक्षक का मोबाइल फोन कवरेज एरिया से बाहर बताता रहा।
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 मस्टर रोल में गड़बड़ी कर हजारों डकार लिये
रायगढ़ ! ग्राम पंचायत नवरंगपुर में मनरेगा के अंतर्गत स्वीकृत सड़क निर्माण कार्य में फर्जी मस्टर रोल तैयार कर गबन करने का मामला सामने आया है। गांव के लोगों ने कलेक्टर से मामले की शिकायत कर दोषी लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
कलेक्टर अमित कटारिया के नाम सौंपे गये ज्ञापन में ग्राम पंचायत नौरंगपुर के ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनके यहां राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना अंतर्गत द्वितीय श्रेणी सड़क निर्माण कार्य के लिए तैयार किये गये मस्टर रोल में फर्जी मस्टर रोल तैयार करके ऐसे लोगों के नाम दर्ज किये गये हैं जिनके द्वारा काम ही नहीं किया गया। इसी तरह कई मजदूरों को आधी या एकतिहाई रकम का ही भुगतान किया गया है जबकि मस्टर रोल में पूर्ण भुगतान दर्शाया गया है इस ज्ञापन के साथ गांव के कुछ लोगों ने नोटरी का शपथ पत्र देकर दावा किया है कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है इनमें महेत्तर पिता सालिगराम निषाद के अनुसार उसे काम का 4 हजार रूपये भुगतान किया गया जबकि मस्टर रोल में उनके नाम पर 10 हजार का आहरण दर्शाया गया है। सुखचंद्र पिता धनेश्वर सिदार का दाव है कि उसे दो हजार का भुगतान कर साढ़े पांच हजार आहरण कर लिये गये।
झुलाराम निषाद के अनुसार उनके नाम पर एक हजार का भुगतान दर्शाया गया है जबकि उसने इस काम में मजदूरी ही नहीं की है। इसी प्रकार तोड़ाराम सिदार के नाम पर 5 हजार 2 सौ, शत्रुघन साहू के नाम पर 2400, सुंदरलाल साहू के नाम पर 1800 व बोधन सिदार के नाम पर 1 हजार का आहरण किया गया है जबकि उपरोक्त लोगों ने मजदूरी ही नहीं की।
इसी तरह मोहन सिदार को दो हजार का भुगतान कर 6 हजार कर, जगदीश साहू को 2 हजार का भुगतान कर पांच हजार 800 का, धनेश्वर सिदार को 2 हजार का भुगतान कर 5 हजार का आहरण कर लिया गया है।
नवरंगपुर से कलेक्टोरेट पहुंचे गांव के लगभग दो दर्जन ग्रामीणों ने मामले की शिकायत कलेक्टर से करते हुए पूरे प्रकरण की जांच करने तथा दोषी लोगों को दंडित करने की मांग की। जिसके बाद जिलाधीश ने उन्हें एसडीएम रायगढ़ जे.आर.चौरसिया के पास भेजा। श्री चौरसिया ने पूरे मामले का अध्ययन करने के बाद तत्काल इस मामले की जांच के आदेश दे दिये हैं।
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